Monday, April 27, 2026

मर कर भी जीते हैं कैसे — कोई हमसे पूछे,
दिल छोड़ कर भी जीते हैं कैसे — कोई हमसे पूछे।

टुकड़ों को हमने जोड़ के बनाया घर इस तरह,
टूटते हुए घर में रहते हैं कैसे — कोई हमसे पूछे।


जब ख़ुद से ही बातें करने में सुकूँ मिले,
बिन आवाज़ के जीते हैं कैसे — कोई हमसे पूछे।

हर कदम पर सोच कर जो रखना पड़े कदम,
तलवार पे चलते हैं कैसे — कोई हमसे पूछे।

दुनिया को जीत कर भी आ जाए अगर,
पर ख़ुद से रोज़ हारते हैं कैसे — कोई हमसे पूछे।

उनको सलामत रखने की चाहत में हम,
अपनी ही सलामती खोते हैं कैसे — कोई हमसे पूछे।

उनसे निभा के वफ़ा-ए-इश्क़ यूँ,
ख़ुद से ही बेवफ़ा होते हैं कैसे — कोई हमसे पूछे।

- अभिनव शर्मा "दीप" 

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